यह भी पढ़ें:

You'll Also Like

My Other Blogs

Tuesday, September 3, 2013

दो टूक : आजादी के 66 वर्ष बाद आजादी से पूर्व जैसे हालात

आजादी के बाद गांधी-नेहरू जाति नाम व आजाद भारत के पहले युगदृष्टा कहे जाने वाले स्वनामधन्य प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के 17 वर्ष लंबे निरंकुश शासन के बाद 1965 में तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को देश वासियों से सप्ताह में एक दिन उपवास रखने का आह्वान करना पड़ा था। हालांकि इसके साथ ही उन्होंने देश में अन्न उत्पादन को बढ़ाने के लिए 'जय जवान' के साथ “जय किसान” का नारा भी दिया था। यह अलग बात है कि इस नारे से अधिक आज देश की तीसरी प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी को “हरित क्रांति” के जरिए देश के अन्न उत्पादन को निर्यात की क्षमता तक विकसित करने का श्रेय दिया जाता है। बहरहाल आज 48 वर्ष बाद देश श्रीमती गांधी के ”गरीबी हटाओ” और जनसंख्या नियंत्रण के लिए “हम दो-हमारे दो” जैसे नारों के बावजूद कथित तौर पर 80 करोड़ गरीबों को कुपोषण से बचाने और भरपेट भोजन देने की ऐतिहासिक कही जा रही राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना लाने को मजबूर हुआ है। 

आज सरकार की ओर से कमोबेश उसी तर्ज पर “सोने का मोह त्यागने” का आह्वान किया गया है और पेट्रोल पंपों को रात्रि में बंद करने जैसे बचकाने बयान आए हैं। आजादी के दौर में एक रुपए का मिलने वाला डॉलर 70 के भाव जाने पर आमादा है। भूख और कुपोषण पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था-अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति शोध संस्थान (आईएफपीआरआई) द्वारा ताज़ा जारी वैश्विक भूखमरी सूचकांक-2010 में भारत को 67वां स्थान दिया गया है जो सूची में चीन और पाकिस्तान से भी नीचे है। ऐसे में उत्साहित दुश्मन राष्ट्र चीन व पाकिस्तान भारत पर कमोबेश एक साथ गुर्रा रहे हैं, और हमारे देश के सबसे बड़े अर्थशास्त्री कहे जाने वाले प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह देश की सुरक्षा और रुपए की घटती कीमत, घटती विकास दर और बढ़ते मूल्य सूचकांक के साथ मुद्रा स्फीति व आपातकाल जैसे हालात स्वयं लाकर मिमियाने की मुद्रा में नजर आ रहे हैं। साथ ही परोक्ष तौर पर यह चुनौती देते भी दिखते हैं कि जब वह नहीं कर पा रहे तो औरों की क्या बिसात !

ऐसे में अच्छा हो कि प्रधानमंत्री थोड़ी और हिम्मत जुटा लें और सरकार और सरकारी मशीनरी के “खाने” व भ्रष्टाचार पर लगाम न कस पाने की अपनी विफलता को स्वीकार कर देश वासियों से बिना घबराए, सोने और पेट्रोल के साथ कम दाल-रोटी “खाने” करने की अपील भी कर दें, शायद देश की समस्त समस्याओं का हल अब इसी कदम में निहित है। 

यह भी पढ़ें: 

1.कांग्रेस के नाम खुला पत्र: कांग्रेसी आन्दोलन क्या जानें....
2. नैनीताल हाईकोर्ट ने सीबीआई की यूं की बोलती बंद
3. अमेरिका, विश्व बैंक, प्रधानमंत्री जी और ग्रेडिंग प्रणाली
4. जनकवि 'गिर्दा' की दो एक्सक्लूसिव कवितायें
5. कौन हैं अन्ना हजारे ? क्या है जन लोकपाल विधेयक ?
6. नीरो सरकार जाये, जनता जनार्दन आती है
7. यह युग परिवर्तन की भविष्यवाणी के सच होने का समय तो नहीं ?
  

Gadget

This content is not yet available over encrypted connections.